गया। गया शहर के उत्तरी क्षेत्र बागेश्वरी मोहल्ले स्थित मां बागेश्वरी मंदिर स्थापित है। औरंगजेब शासन काल में मंदिर की स्थापना किया गया था। मां बागेश्वरी के हाथ में वीणा रहने से मां सरस्वती व सिंह पर सवारी रहने के कारण मां दुर्गा रुप भी दिखती है। इस मंदिर की स्थापना के समय बागेश्वरी मोहल्ला घना जंगल था। उसी जंगल से कहानी जुड़ी है।

विशेषता –

मां बागेश्वरी मंदिर की स्थापना काल में घना जंगल था। परन्तु मंदिर के अगल बगल मोहल्ला में रह रहे लोग इस मंदिर मे पूजन अर्चना करने लगे। पूजन अर्चना करने से लोगों की मन्नतें पूर्ण होने लगी। लोगों में आस्था व विश्वास में जागरुकता आई। विश्वास जागरुक होने के कारण मंदिर का जिर्णोद्धार होते चला गया। परिणामत: आज के दिन बागेश्वरी मोहल्ले नगरनिगम क्षेत्र में परिणत हो गया। और मंदिर गया पटना रोड पर आ गई।

इतिहास-

बागेश्वरी मंदिर स्थापना से पूर्व क्षेत्र घना जंगल के रुप में था। शासक औरंगजेब जंगल की कटाई के लिए तत्कालिन बुदौली स्टेट नवादा के जमींदार रामानुग्रह पूरी को ठिका दिया था। जमींदार पूरी द्वारा मजदूर लगाकर जंगल की कटाई शुरु किया गया था। तभी मजदूरों को एक काला पत्थर की पड़ी एक छोटी सी प्रतिमा दिखाई दिया। मजदूरों ने उक्त प्रतिमा को जमींदार पूरी को सौंप दिया। वे प्रतिमा को खड़ी कर रख दिया। तभी एक रात में प्रतिमा अपने आप बड़ा रुप में तब्दील हो गया। तभी जमींदार ने प्रतिमा को स्थापित कर दिया। हालांकि औरंगजेब अपने शासनकाल में उक्त प्रतिमा को खंडित कर दिया गया था। जिसे पूरी द्वारा मरम्मत कराया गया। इसी बीच जमींदार पूरी की मौत हो गई। तत्पश्चात जमींदार का रिस्तेदार यशवंत पूरी ने किसी मांग को ले मन्नत माना। मन्नत पूर्ण होने पर मंदिर का निर्माण कराया। जो आज मां बागेश्वरी के नाम से मसहूर है।

पूजन विधि-

मां बागेश्वरी मंदिर का सुबह पांच बजे पट खुलता है। तत्पश्चात मंदिर की सफाई कर माता का आरती व भोग ल्रगता है। भोग लगने में चावल, चना दाल व सब्जी का भोग लगाया जाता है। तभी श्रद्धालुओं की पूजन अर्चना करने के लिए आना शुरु हो जाता है। जो दोपहर 12 बजे तक फिर पट बंद कर दिया जाता है। पुन: दो बजे फिर पट खोल दिया जाता है। जो रात नौ बजे तक श्रद्धालुओं द्वारा पूजन जारी रहती है। मंगलवार को विशेष पूजा किया जाता है। पट खुलने के बाद सफाई कर ओढूल फूल व गेंदा फूल से माता का सिंगार किया जाता है। सुबह में भोग में खीर तथा शाम में खीर और पुड़ी का भोग लगाया जाता है।

कौन करते हैं संचालन–

मां बागेश्वरी मंदिर का देखभाल जमींदार रामानुग्रह पूरी के रिस्तेदार सह नवादा के पूर्व सांसद सूर्य प्रकाश पूरी द्वारा किया जा रहा है। वे हमेशा मंदिर में आते रहते हैं। उनके द्वारा पूजारी सुनील पांडे को रखा गया है। पूजारी श्री पांडेय ने बताया कि मंदिर की कुल रकवा पौने तीन बिगहा का रकवा है। जिसमें एक समुदायिक भवन का निर्माण कराया गया है। जहां स्थानीय वासियों द्वारा शादी या अन्य कार्यक्रम के लिए उपयोग किया जाता है।

Specialty –

Maa Bageshwari Temple was a thick forest during the establishment period. But people living in the adjacent mosque of the temple started offering prayers in this temple. The worship of the people started fulfilling the vows of people. People came to have awareness in faith and belief. Being confident, the temple was renovated due to it. As a result, on this day, Bageshwari Mohalla turned into a municipal area. And the temple went to Patna Road.

History-

Before the establishment of Bageshwari Temple, the area was in the form of dense forest. The ruler Aurangzeb had given place to the landowner Ramanughraa Purna, the landowner of Badauli State Nawada, for the deforestation. Jungle harvesting was started by placing laborers by landlord. Only then did the workers see a small statue lying on a black stone. The workers handed over the said statue to Zamindar Pura. They kept the statue standing. That’s why the image itself became a big one in one night. Then the landlord established the statue. Although Aurangzeb had broken the said statue during his reign. Which was repaired by the whole. Meanwhile landlord’s death died. Thereafter, Rashtadar Yashwant Pillay of the Landlord considered a demand for a demand. On completion of the vowel, the temple was built. Today, mother is known as Bageshwari.

Poojan Method-

The palace opens at 5 o’clock in the morning of the Mother Bageshwari Temple. After that cleaning of the temple, the aarti and enjoyment of the mother is lagata. Consumption of rice, gram dal and vegetable is applied in order to enjoy it. Only then do the pilgrims begin worshiping. Which is closed again till 12 noon. Again at two o’clock again the door is opened. The worship continues by devotees till 9 p.m. Special worship is done on Tuesday. After the opening of the palette, the mantra is singled out after cleaning it with fluffy flowers and mung flower. Kheer in the morning and in the evening the kheer and pudhi are being used in the evening.

Who do the operation–

The care of Mother Bageshwari temple is being done by the former Parliamentarian Sun Prakash Purna of Rashtravadi Ram Nana Ram of Ramanughra Pura. They always keep coming to the temple. Pujari Sunil Pandey has been kept by him. Pujari Shri Pandey said that the total amount of the temple is three hundred rupees of bidha. In which a community building has been built. Where local settlers are used for marriage or other programs.

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